क्या समय यात्रा संभव है ? | Is Time Travel Possible ?

क्या समय यात्रा संभव है ? | Is Time Travel Possible ?

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टाइम ट्रेवल के बारे में तो आपने कभी न कभी जरूर सुना होगा | ज्यादातर लोगों को तो ये बिलकुल बेतुकी और काल्पनिक बातें लगती हैं और वो इसे बस एक साइंस-फिक्शन बोल के नज़रंदाज़ कर देते हैं |

हालाँकि, विज्ञान की दुनिया में साइंस-फिक्शन की बातें तो होती ही हैं पर कुछ चीज़े ऐसी भी है जो असल है |सब कुछ बदल गया जब, 1915 में आइंस्टीन ने General Theory of Relativity को बताया  | इस थ्योरी, यानि सिद्धांत के अनुसार, हर परिस्तिथि में समय एक गति से नहीं चलती | समय अपने आप को धीरे या तेज़ कर सकती है | दरअसल, समय की फ्लो, यानि बहाव आपके गति पर निर्भर करती है | ये सब बातें जो अभी आप पढ़ रहे हो ये सब कुछ Theory of Relativity में वैज्ञानिक रूप से साबित हो चुकी है | कुछ चीज़े होती हैं जो की असल जिंदगी में परयोग करने के बाद करी जाती है, जो वैज्ञानिक रूप से साबित हो चुकी होती हैं, और कुछ चीज़े सैद्धांतिक रूप से साबित होती है | टाइम ट्रेवल भी गणित के ज़रिये साबित करी जा चुकी है | इसका मतलब की समय यात्रा, यानि टाइम ट्रेवल बिलकुल संभव है| क्यूंकि जब इसे गणित के ज़रिये सैद्धांतिक रूप से साबित किया जा चूका है तब ये साइंस-फिक्शन तो बिलकुल भी नहीं | टाइम ट्रेवल २ तरीके की होते हैं :- पहली, ” समय को तेज़ी से पार कर के भविष्य में जाना, और दूसरी, “समय में पीछे जाना” |

इस आर्टिकल को पूरा ज़रुर पढ़ें क्यूंकि, इस आर्टिकल में आपको समय यात्रा के बारे में जो कुछ भी जानना है वो सब पता चलने वाला है | जैसा की मैंने कहा की समय आपके स्पीड पर निर्भर होती है, तो समय यात्रा भी आप के स्पीड से ही संभव है | इस यूनिवर्स की एक स्पीड लिमिट है, यानि गति की सीमा है, जो की है 2,99,337.984 KM/S मतलब की आप इस गति से ज्यादा ट्रेवल कर ही नहीं सकते | प्रकृति के नियम आपको ऐसा करने नहीं देती, मतलब आप कुछ भी कर लें, आप इस गति से जायदा तेज़ी से नहीं जा सकते | मान लीजिये की हम सब ने मिल के एक ऐसा अंतरिक्ष यान बनाया जो लाइट के स्पीड के ९९% स्पीड पे ट्रेवल कर सकती है | वो अंतरिक्ष यान स्पीड लिमिट को तो नहीं तोड़ सकती लेकिन मान लीजिये की वो स्पीड लिमिट के बहुत ही क्लोज यानि उसके बहुत ही करीब पहुंच गयी तो इसका अंजाम जानते हैं आप क्या होगा?

 

एक एक्सपेरिमेंट में टाइम ट्रेवल को साबित भी किया गया था पर केवल कुछ नेनो सेकंड्स के लिए | ये कोई ज्यादा समय तो नहीं है लेकिन इससे हमे ये तो पता चल ही गया की टाइम ट्रेवल करना असल में काल्पनिक नहीं बल्कि वाकई में संभव हैं |

ये एक्सपेरिमेंट अक्टूबर 1971 में किया गया था और इसका नाम है HAFELE-KEATING EXPERIMENT | अस्त्रोनोमेर रिचर्ड कीटिंग ने 4 एटॉमिक क्लॉक, यानि परमाणु घड़ियों को लेकर उड़ान भरा और उन्होंने पूरे धरती का 2 चक्कर लगाया और जब वो चक्कर लगा के वापस अमेरिका के नेवल ऑब्जर्वेटरी, यानि बेधशाला में आयें तो उन्होंने दोनों घड़ियों के समय को मिलाया और गज़ब बात ये पता चला की उनका ऑब्जर्वेटरी में रखा घडी उनके प्लेन में मौजूद घडी से कुछ नेनो सेकंड आगे था | अगर इसे हम एक उधाहरण से समझे तो अगर दोनों घडी का समय शुरुआत में 4 घंटा १० मिनट और १० करोड़ १० लाख नेनो सेकंड था और अगर हम मान ले की वो ठीक 4 घंटे के बाद वापस धरती पर आयें तब दोनों घडी का समय ८ बजकर १० मिनट और १० करोड़ १० लाख नेनो सेकंड होना चाहिए, सही ?

पर उनके विमान के घडी का समय उनके ऑब्जर्वेटरी के घडी के समय से १० लाख नेनो सेकंड पीछे था मतलब की उसमे ८ बजकर १० मिनट और १० करोड़ नेनो सेकंड बज रहा था | अब कुछ लोग बोलेंगे की अरे यार ये तो बस कुछ नेनो सेकंड का अंतर है, और ये भी तो हो सकता है की वो घडी ही ख़राब हो! लेकिन ऐसा नहीं है क्यूंकि इस दुनिया में एटॉमिक क्लॉक यानि परमाणु घड़ियों से ज्यादा सटीक और कुछ भी नहीं है! ये एक सेकंड के करोड़वे हिस्से को भी रिकॉर्ड कर सकता है | इस एक्सपेरिमेंट से आपको शायद लग रहा होगा की असल में हुआ क्या? क्या, प्लेन में रखी घडी स्लो हुई या फिर धरती पे रखी घडी तेज़?

 

दरअसल प्लेन वाली घडी धीमी हो गयी! इसका परिणाम क्या हुआ ?इससे हमे क्या सिखने को मिला ? | इससे हमे ये जानने को मिला की जो चीज़ जितनी तेज़ी से चलेगी, उसकी समय की रफ़्तार उतनी कम होगी |ये अब तक के इतिहास का एकमात्र साबित किया गया एक्सपेरिमेंट है | धरती पे रखी घडी तो एक जगह स्थिर थी और वो विमान में रखी घडी 900 km/hr से ट्रेवल कर रही थी | इसका मतलब यह है की कोई भी चीज़ जो गति में है उसके लिए समय धीमा हो जाता है | और एक बात जो आपको सुनने में अजीब लगे लेकिन वो पूरी तरह से सच है वो ये है की जब आप किसी बस या गाड़ी में घूम रहे होते हो तब आपके लिए समय धीमा हो जाता है, उसके मुकाबले जब आप घर पे बैठे हुए होते (बस में समय की रफ़्तार कम होती है और घर में ज्यादा) | ज्यादा फर्क नहीं होती पर मिलिसेकंड के करोड़वें हिस्से का फर्क तो ज़रूर पड़ता है | इससे हमें ये पता चलता है की हम समय में आगे जा सकते हैं इस अंतरिक्ष यान वाली तकनीक से, मतलब हाँ, समय में आगे जाना बिलकुल संभव है अगर आप बहुत, बहुत ही तेज़ी से ट्रेवल कर सके तो |

 

पर आप सोच रहे होंगे की सिर्फ कुछ मिलीसेकंड भविष्य में जा के क्या हो जाएगा? तो अगर आप चाहते हो की आप ५ साल आगे यानि भविष्य में जाएँ और उस वक़्त की दुनिया को देखें तो उसके लिए आपको बहुत, बहुत ही तेज़ी से ट्रेवल करना होगा और बिलकुल यही बात महान वैज्ञानिक स्टेफेन हव्किंग ने भी बताया है की अगर आप लाइट की गति से ट्रेवल करें तो ज़रूर टाइम ट्रेवल कर के भविष्य में जा सकते हो | पर ये कैसे होगा, ये कोई भी नहीं बताता और बिलकुल यही बात को मैंने आपको अभी समझाया और वो भी बिल्जुल सरल यानि आसान शब्दों में |

जब आप जो विमान से लाइट की गति से ट्रेवल कर रहे होंगे तो आपके लिए और उस विमान के अंदर की समय स्लो, यानि धीमी हो जाती है और अगर इसी गति से आप पूरे ३ साल ट्रेवल कर के वापस इस धरती पर  आओगे तो आपको ये पता चलेगा की धरती पे 900 साल गुजर चुकी है क्यूंकि आपके लिए वक़्त धीमी हो जाती है पर बाकी दुनिया के लिए नहीं | पर यंही वो बात आती है की क्या हम अभी इस वक़्त भविष्य में जा सकते हैं इस तकनीक का इस्तेमाल करके? तो दोस्त, ये तो ज़ाहिर सी बात है की लाइट की गति से ट्रेवल करने वाली विमान कोई बना भी लिया तो इसे चलने के लिए जो इंधन इसमें लगेगी वो हम इसे नहीं दे सकतें पर भविष्य में हम अगर ऐसा कर पायें तो ये मानव जाती के लिए बहुत गर्व की बात होगी |

 

जंहा तक बात है समय में पीछे जाने की तो ये भविष्य में जाने से भी कई ज्यादा विवादास्पक है क्यूंकि पास्ट यानि अतीत में आप किसी प्रकाश की गति से ट्रेवल कर के नहीं जा सकतें | एक पैराडॉक्स यानि एक विरोधाभास उतपन होती है जिसका नाम है “The Grandfather Paradox” | ये एक बहुत ही प्रसिद्ध विरोधाभास है जो यह कहती है की अगर आप किसी भी तरीके से समय यात्रा कर के अतीत में चले गए और आपने अपने दादाजी की हत्या कर दी तो आप इस वक़्त यंहा पर कैसे रहोगे? मतलब की जब आपके दादाजी ही नहीं रहे तो आपका अस्तित्वा कैसे होगा? आपका जन्म कैसे हुआ ?| जब आप पैदा ही नहीं हुए तो आपने अपने दादाजी को कैसे मारा ? ये एक बहुत ही दिमाग घुमाने वाली बात हो गयी जिसका कोई उत्तर नहीं है और इसके चलते कई लोग ये मानते हैं की अतीत में जाना नामुमकिन है! पर स्टीफन हॉकिंगका ये कहना है की ये बिलकुल संभव है और ये केवल एक ही तरीके से संभव है और वो है “वर्महोल” | वर्महोल के बारे में सबसे पहेले अल्बर्ट आइंस्टीन ने बताया था और इसी कारन इसका दूसरा नाम “Einstein Rosen Bridge” है | वर्महोल एक ऐसा पैसेज, यानि टनल है जो दो अलग-अलग जगहों और दो अलग-अलग वक़्त को जोड़ती है | आश्चर्यजनक बात तो यह है की वर्महोल हमारे और आपके बीच ही मौजूद है पर वो बहुत ही छोटे लेवल पे मौजूद है | वैज्ञानिकों का ये मानना है की अगर हम वर्महोल को कब्ज़ा कर के उसे बड़ा कर लें, तो हम उसमे घुस के समय में बड़ी ही आसानी से पीछे जा सकते हैं लेकिन, आज की टेक्नोलॉजी में न उतनी रफ़्तार वाली अंतरिक्ष यान बनाना संभव है और न तो वर्महोल को कब्ज़ा करने वाली मशीन बनाना संभव है | पर ये तो हम उम्मीद कर ही सकते हैं की भविष्य में और भी बेहतर टेक्नोलॉजी के मदद से हम ये सब संभव कर पायें |

आशा करता हु की  ये आर्टिकल आपको बहुत पसंद आई | शेयर करें अगर पसंद आई तो|

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